आरती मलिक

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प्यार ये तो सभी को होता है। लेकिन मेरा प्यार कुछ अलग ही अंदाज का था मेरा नाम अब्दुल मलिक है और मै एक गाँव से हू। कक्षा 1 से लेकर कक्षा 6 तक मैं C.D.M PUBLIC स्कूल
मैं पढा। फिर 2 साल D.R.S इंटर कॉलेज रामपुर कलां मे पढ़ा। और फिर 2 साल जनता विद्या मन्दिर हाई स्कूल जयधारी यमुननगर हरियाणा में 9th-10th की अब किस्मत मुझे उसकी प्यार वाले मोड पर ले आती है। और मेरे पापा मुझे फिर से D.R.S इंटर कालेज रामपुर कलां सहारनपुर (उ.प्र) में एड्मिसं करा देते है। कॉलेज मे जातें ही मुझे सब टीचर पसन्द करते थे मुझे पंजाबी गाने सुनते थे और मैं पढ़ने मे भी होशियार था पुरा कॉलेज मुझे एसे जनता था जैसे मैं कोई बडा नेता हू। हर लड़का लड्किया बच्चे टीचर और यहा तक चपरासी भी मुझें मेरे नाम से आवाज देते थे। वो इसलिये क्योकिं कक्षा पहली सीट पर बैठना। मुझे पसंद था। और टीचर के हर Questions के answers देना मेरा ही कांम था। बस ये समझ लिजिये की मै हीरो था आपने स्कूल का।
30 दिसंबर 2015 मे मैंने एक लडकी को पहली बार देखा।और उस लडकी ने मुझे काफी देखा और सुना था मेरे बारे ने जब मैंने उसको पहली बार देखा था तो मैं सिर्फ ये ही पुछ पाया था। की इस लडकी का नाम क्या है।
किसी दोस्त ने बताया की
उसका नाम (आरती ) है
मुझे और उसको एक ही नज़र मे प्यार नही हुआ ।
एक दुसरे से
आठ दिन के बाद वो मेरी कक्षा के पास पानी पीने आई
फिर दो तीन दिन कर बाद मेरे दोस्त ने बोला की मैं उसकी गर्लफ्रेंड का पैन वापसी कर के आ जाऊ
जैसे ही मै उसकी गर्लफ्रेंड का पैन वापस करने गया तो मुझे उसके पास आरती बैठी हुई थी और एक बात तो ये है की उसने मुझ से पैन लेने से पहले भाई बोल दिया ।
सायद मुझे लगा की अब कुछ नही हो सकता क्योकी मुझे भाई बोलने वाली लडकी मुझे प्यार करेगी
26 जनवरी मे हम दोनो एक दुसरे को समारोह शुरु होने से लेकर खत्म होने तक एक दुसरे को देखते रहे। अब हम ने एक दुसरे को देखना शुरु कर दिया। 12 फरवरी को मै सुबह 07:15 पर ही स्कूल चला जाता था और उसको देखने के लिए स्कूल की दुसरी बिल्डिंग पर जाकर उसको देखने के लिए खडा हो गया। अब जैसे ही वो आई और उसने मुझे देखा और पास आकर निचे से ही कहा ओए छत पर क्या कर रहा है।
सायद उसको पाता था की ये यंहा बैठा कर मेरा ही इंतजार करता है। मैंने उसको हँस कर मन ही मन मे जवाब दे दिया था और वो समझ भी गयी थी की मेरा इन्तजार
14 फरवरी को वो मुझे एक गिफ्ट देती है और उस गिफ्ट मे एक गुलाब का छोटा सा फुल था जो आज भी मेरे पास है और जब तक रहेगा जब तक मै इस संसार को छोड कर नही जाऊगा।
और अब 20 फरवर मे उसका फ़ोन मेरे दोस्त के फोन पर आता है और मेरा दोस्त मुझे आपने घर पर बुला कर कहता है की आज उसका फ़ोन आया है और तेरा नंबर मँगा रही है।
मेरे पास उस टाईम मे कोई फ़ोन और ना ही कोई सीम कार्ड था। मै जल्दी जल्दी मे सीम लिया और आपनी मम्मी के फ़ोन मे उसको डाल कर...

उससे बातें करने लगा।
जब बातें होने लगी और उसने मुझे एक दिन बोला की आपने मुझे आज तक 3 words नही बोले मै समझ नही था की ये कों से तीन वर्ड है जो मुझे बोलने नही आज तक और वो वर्ड थे (I LoVe YoU) जो मै उसको 8 दिन तक बात करते हुआ नही बोले 22-24 फरवरी मे मैने उसको पहली बार 3 वर्ड बोले थे।
मैं उसको देखने के लिए सुबह 7:15 पर स्कूल चला जाता था और वो 07:30 पर आती थी
जब वो घर से चलती थी तो मुझे पहले फ़ोन करती थी
मै अभी सो कर उठी हू अब खाना खा रही हू अब तैयार हो कर स्कूल आ रही हू ।
उसको घर से स्कूल आने मे सिर्फ 15-20 मिनट लगते थे।
उसके स्कूल आने पर बहुत खुशी मिलती थी मुझे
और अब प्राथना शुरु होती थी तो वो मुझे देखती थी और मैं उसको देखता था लेकिन जब उसको प्राथना बोलने के लिए बाहर निकला जाता था तो वो सिर्फ आंखे बन्द करके ईश्वर (अल्लाह) को याद करती थी। हमारी कक्षा और उस की कक्षा 90॰ के कोण पर थी।
वो आपनी कक्षा की विंडो पर बैठती थी और मै आपनी कक्षा की विंडो पर
हम एक दुसरे को आमने सामने देखते थे।
और खुशी खुशी अपनी पढाई करते थे।
कभी वो मुझे पढते हुए देखती और कभी मै उसको पढते हुए देखता कभी वो ब्लैक बोर्ड पर टीचर की बात को ध्यान से देखती और कभी मै बोर्ड पर भौतिक विज्ञान को ध्यान से पढता था।
इंटरवल मे मै समोसे खाता था और वो घर से टिफिन लेकर आती थी।
और जब स्कूल की छुट्टी होती थी मै उसके साथ ही बाहर आया था और जब वो बाहर आती थी अपनी साईकिल लेकर और मुझे 2-3 बार वापस मुड़ कर ना देख ले तब तक मुझे सकुन नही मिलता था फिर वो जैसे ही मोड पर चली जाती थी तो मै भी खुद अपने घर के लिए निकलता था मुझे अपने घर आने मे 30 मिनट से कम लगते थे।
जब तक वो अपनी ड्रेस बदलती थी और खाना खाती थी
मै भी ये सब कर के फिर रात 09:00 बजे तक बात करके सो जाते थे और फिर हर सुबह ये ही रेपिट होता था।
रविवार को हम दोनो सुबह बात कर के फिर अपना स्कूल का कब पुरा करते फिर खाना खा कर पुरा दिन बातें करते।
कभी वो मुझे गिफ्ट करती कभी मै उसको गिफ्ट करता
उसने मुझे टी-शर्ट फ़ोन घड़ी गुलाब के फुल और भी क्या क्या दिया है
और मै उसको रोज़्स्पैन अँगूठी डेयरी फोटो ये सब कुछ दिया है।
वो मेरे से जब बात करती थी तो उसके भाई उसको फ़ोन पर बात करते हुआ देख लेते थे तो उसको मार पडती थी।
और वो मेरे लिए सब कुछ सहन करती थी लेकिन फिर भी मुझे बात करना उसका एक पागलपन ही था
वो मेरे लिए कुछ भी करने को तैयार थी
बस वो पागलपन ………..
आज तक मुझे वो पागलपन की और लडकी मे नज़र नही आया।।
अगर आप को मेरी कहनी अच्छी लगी तो मुझे बताये
फिर मै आपको आगे की कहनी फिर ही बताऊगा।।

Submitted By:- Abdul Malik

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Comments

2 Responses

  1. Shivam Mehra

    nice

  2. md jeeshan

    Yes..😍

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